5 important changes to credit card rule – 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए कई नए नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आपके खर्च, बिल पेमेंट और रिवॉर्ड प्वाइंट्स पर पड़ेगा। बैंक और कार्ड कंपनियां समय-समय पर अपनी पॉलिसी में बदलाव करती रहती हैं, लेकिन इस बार जो बदलाव किए जा रहे हैं वे रोजमर्रा की खरीदारी से लेकर ऑटो-डेबिट और चार्जेस तक को प्रभावित करेंगे। अब लेट पेमेंट, न्यूनतम भुगतान और रिवॉर्ड रिडेम्पशन से जुड़े नियम पहले जैसे नहीं रहेंगे, जिससे कार्डधारकों को अधिक सावधानी बरतनी होगी। खासकर जो लोग हर महीने सिर्फ मिनिमम अमाउंट देकर काम चलाते हैं या कार्ड से ज्यादा खर्च करते हैं, उनके लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इन नए नियमों का उद्देश्य ग्राहकों को जिम्मेदारी से खर्च करने के लिए प्रेरित करना और बकाया भुगतान को कम करना है। इसलिए जरूरी है कि आप समय रहते इन बदलावों को समझ लें ताकि अतिरिक्त चार्ज, पेनाल्टी और क्रेडिट स्कोर पर असर से बचा जा सके।
रिवॉर्ड प्वाइंट्स और कैशबैक सिस्टम में बदलाव
नए नियमों के तहत कई बैंक अपने क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड प्वाइंट्स स्ट्रक्चर में संशोधन करने जा रहे हैं। अब सभी खर्चों पर पहले जितने प्वाइंट्स नहीं मिलेंगे और कुछ कैटेगरी जैसे वॉलेट लोड, ऑनलाइन गेमिंग, फ्यूल या किराया भुगतान पर रिवॉर्ड कम या पूरी तरह बंद किए जा सकते हैं। इसका मतलब है कि पहले जहां ग्राहक बड़े बिलों को कार्ड से भरकर ज्यादा प्वाइंट्स कमा लेते थे, अब उन्हें सीमित लाभ मिलेगा। कई कार्ड कंपनियां कैशबैक की अधिकतम सीमा भी तय कर सकती हैं, जिससे महीने भर में मिलने वाला फायदा सीमित रहेगा। इसके अलावा रिवॉर्ड रिडीम करने पर भी प्रोसेसिंग फीस लगाई जा सकती है। इसलिए अब कार्ड उपयोग करने से पहले यह समझना जरूरी होगा कि किस खर्च पर फायदा है और किस पर नहीं। समझदारी से खर्च करने वाले ग्राहक ही इन बदलावों के बाद भी अधिक लाभ उठा पाएंगे।
मिनिमम पेमेंट और लेट फीस से जुड़े नियम
अब क्रेडिट कार्ड बिल में दिखने वाला “मिनिमम अमाउंट ड्यू” पहले जितना सुरक्षित विकल्प नहीं रहेगा। नए नियमों के अनुसार यदि ग्राहक बार-बार सिर्फ न्यूनतम भुगतान करता है, तो उस पर अधिक ब्याज लगाया जा सकता है और उसका बकाया तेजी से बढ़ेगा। बैंक अब ग्राहकों को पूरा भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और लंबे समय तक बकाया रखने पर अतिरिक्त चार्ज लग सकते हैं। साथ ही लेट पेमेंट फीस की संरचना भी बदलेगी, जहां देरी होने पर स्लैब के अनुसार ज्यादा जुर्माना लग सकता है। कई मामलों में ऑटो-डेबिट फेल होने पर भी पेनाल्टी लगेगी। इससे साफ है कि बिल की आखिरी तारीख को नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है। जो ग्राहक समय पर भुगतान करेंगे उनका क्रेडिट स्कोर सुरक्षित रहेगा, जबकि लापरवाही करने वालों की सिबिल रेटिंग खराब हो सकती है और भविष्य में लोन लेना मुश्किल हो सकता है।
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ऑटो-डेबिट और ई-मैंडेट नियम
1 अप्रैल से ऑटो-डेबिट भुगतान से जुड़े नियमों को भी सख्त किया जा रहा है। अब किसी भी ऑटो पेमेंट से पहले ग्राहकों को SMS या ईमेल के जरिए प्री-अलर्ट मिलेगा और तय सीमा से अधिक भुगतान पर अतिरिक्त पुष्टि जरूरी होगी। यदि खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं हुआ और ऑटो-डेबिट फेल हो गया, तो बैंक पेनाल्टी लगा सकते हैं। इससे ग्राहकों को यह ध्यान रखना होगा कि बिल की तारीख से पहले उनके बैंक खाते में पर्याप्त राशि मौजूद हो। ई-मैंडेट के जरिए सब्सक्रिप्शन भुगतान भी नियंत्रित होंगे, जिससे अनावश्यक कटौती से बचाव होगा। हालांकि इससे सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन थोड़ी लापरवाही महंगी साबित हो सकती है। इसलिए अब ऑटो-पे सुविधा चालू रखने के साथ-साथ बैलेंस और मैसेज अलर्ट पर ध्यान देना जरूरी होगा।
फ्यूल, यूटिलिटी और इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन चार्ज
नए नियमों के तहत फ्यूल पेमेंट, बिजली-पानी के बिल और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त चार्ज लागू किए जा सकते हैं। कई बैंक फ्यूल सरचार्ज छूट को सीमित कर रहे हैं और कुछ कार्ड्स पर यूटिलिटी बिल पेमेंट पर प्रोसेसिंग फीस भी लग सकती है। इसके अलावा विदेश में खर्च या अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट पर भुगतान करने पर विदेशी मुद्रा मार्क-अप फीस बढ़ सकती है। इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो नियमित रूप से बड़े बिल क्रेडिट कार्ड से भरते हैं। अब ऐसे खर्च करते समय कार्ड की टर्म्स और कंडीशंस पढ़ना जरूरी हो जाएगा। सही कार्ड चुनने और सही जगह उपयोग करने से ही ग्राहक अतिरिक्त शुल्क से बच पाएंगे और अपने खर्च को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगे।









