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Land Registry Documents – अगर आपने कभी जमीन या प्लॉट खरीदने के बारे में सोचा है, तो आपको पता होगा कि यह काम जितना आसान दिखता है, उतना होता नहीं है। भारत में प्रॉपर्टी खरीदना कई बार सिरदर्द बन जाता है। फर्जी कागज, डुप्लीकेट रजिस्ट्री, एक ही जमीन को दो-दो लोगों को बेच देना जैसी घटनाएं अक्सर सुनने को मिलती हैं। ऐसे में सरकार ने जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कुछ बड़े बदलाव किए हैं, ताकि आम लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।
जमीन से जुड़े मामलों में सबसे बड़ी समस्या पारदर्शिता की कमी रही है। कई बार खरीदार को पूरी जानकारी ही नहीं दी जाती कि जमीन पर पहले से कोई केस चल रहा है या उस पर लोन है। बाद में जब विवाद सामने आता है, तो मामला कोर्ट तक पहुंच जाता है और सालों तक चलता रहता है। इसी परेशानी को कम करने के लिए अब रजिस्ट्री प्रक्रिया में दस्तावेजों की जांच को काफी सख्त कर दिया गया है।
पैन कार्ड की अनिवार्यता से बढ़ेगी पारदर्शिता
नए नियमों के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री के समय खरीदने और बेचने वाले दोनों पक्षों के लिए पैन कार्ड देना जरूरी कर दिया गया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि हर लेन-देन का रिकॉर्ड साफ-साफ दर्ज रहेगा। इससे काले धन पर भी लगाम लगेगी और फर्जी ट्रांजैक्शन करना मुश्किल हो जाएगा। पहले कई बार बिना सही पहचान के भी सौदे हो जाते थे, लेकिन अब ऐसा कर पाना आसान नहीं होगा।
फोटो और पहचान सत्यापन से रुकेगी जालसाजी
अब रजिस्ट्री दस्तावेजों के साथ दोनों पक्षों की पासपोर्ट साइज फोटो लगाना भी जरूरी है। इसके अलावा पहचान पत्र का सही मिलान किया जाएगा। इससे किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर फर्जी रजिस्ट्री कराना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। कई मामलों में देखा गया है कि लोगों की पहचान का गलत इस्तेमाल करके जमीन बेच दी गई। नए नियम इस तरह की धोखाधड़ी पर बड़ा ब्रेक लगाने का काम करेंगे।
आधार और बायोमेट्रिक जांच से बढ़ेगी सुरक्षा
अब रजिस्ट्री प्रक्रिया में आधार कार्ड को भी अहम भूमिका दी जा रही है। कई जगहों पर बायोमेट्रिक सत्यापन यानी उंगलियों के निशान और आंखों की स्कैनिंग के जरिए पहचान पक्की की जा रही है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जो व्यक्ति जमीन बेच या खरीद रहा है, वही असली मालिक है। टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से जमीन रजिस्ट्री पहले से ज्यादा सुरक्षित बन रही है।
डिजिटल रिकॉर्ड से तुरंत मिलेगी पूरी जानकारी
खसरा, खतौनी और अन्य जमीन रिकॉर्ड को अब तेजी से डिजिटल किया जा रहा है। इसका फायदा यह है कि अब जमीन का पूरा इतिहास ऑनलाइन देखा जा सकता है। अगर किसी जमीन पर पहले से विवाद है या वह सरकारी रिकॉर्ड में किसी और के नाम दर्ज है, तो वह जानकारी तुरंत सामने आ जाएगी। इससे खरीदार पहले ही सतर्क हो सकता है और गलत सौदे से बच सकता है।
बकाया बिल और टैक्स चुकाना होगा जरूरी
एक और अहम बदलाव यह है कि अगर जमीन पर किसी तरह का नगर निगम टैक्स, बिजली बिल या अन्य सरकारी बकाया है, तो पहले उसे चुकाना होगा। बिना बकाया साफ किए रजिस्ट्री आगे नहीं बढ़ेगी। इससे नए खरीदार को पुराने मालिक की गलतियों का खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा। यह नियम खरीदार के हित में काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
ऑनलाइन रजिस्ट्री से खत्म होगी दलालों की भूमिका
अब कई राज्यों में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है। आप घर बैठे आवेदन कर सकते हैं, दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं और स्टांप ड्यूटी का भुगतान भी ऑनलाइन कर सकते हैं। इससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगेंगे और दलालों की भूमिका भी घटेगी। डिजिटल सिस्टम से हर प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
लोन और गिरवी की जानकारी भी होगी साफ
नई डिजिटल व्यवस्था में यह भी देखा जा सकेगा कि जमीन पर कोई बैंक लोन तो नहीं है या वह गिरवी तो नहीं रखी गई। पहले कई लोग बिना यह जांचे जमीन खरीद लेते थे और बाद में पता चलता था कि प्रॉपर्टी पर बैंक का कर्ज है। अब ऐसी जानकारी पहले से मिल जाने पर खरीदार समझदारी से फैसला ले सकता है।
राज्य के अनुसार नियमों में हो सकता है अंतर
यह भी समझना जरूरी है कि जमीन का विषय राज्य सरकारों के अधिकार में आता है। इसलिए अलग-अलग राज्यों में नियमों के लागू होने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है। किसी भी जमीन की खरीद-बिक्री से पहले संबंधित राज्य की आधिकारिक वेबसाइट या रजिस्ट्रार ऑफिस से ताजा जानकारी जरूर ले लें। जरूरत पड़े तो किसी वकील से सलाह लेना भी समझदारी होगी।
कुल मिलाकर देखें तो जमीन रजिस्ट्री के ये नए नियम आम लोगों के लिए राहत भरे हैं। इससे प्रॉपर्टी बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है। टेक्नोलॉजी और सख्त दस्तावेज जांच के जरिए सरकार जमीन से जुड़े विवादों को कम करना चाहती है। अगर लोग भी जागरूक रहें और हर दस्तावेज ध्यान से जांचें, तो सुरक्षित प्रॉपर्टी खरीदना अब पहले से काफी आसान हो सकता है।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। जमीन रजिस्ट्री से जुड़े नियम राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं और समय-समय पर बदल भी सकते हैं। किसी भी संपत्ति लेन-देन से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या कानूनी विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
Anshika Sharma
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