General Knowledge – बैंक को हिन्दी में मुख्य रूप से “अधिकोष” कहा जाता है, हालांकि सामान्य बोलचाल की भाषा में लोग बैंक शब्द का ही प्रयोग करते हैं। अधिकोष का अर्थ होता है धन रखने का स्थान या वह संस्था जहाँ लोगों की जमा पूंजी सुरक्षित रखी जाती है। प्राचीन समय में धन को सुरक्षित रखने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएँ थीं, लेकिन आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था के विकास के साथ बैंक एक संगठित वित्तीय संस्था के रूप में स्थापित हुए। आज बैंक केवल धन जमा करने का स्थान नहीं है, बल्कि यह ऋण प्रदान करने, निवेश की सुविधा देने, ऑनलाइन लेन-देन कराने और आर्थिक गतिविधियों को संचालित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। हिन्दी में अधिकोष शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसका आशय कोष या खजाने से है। इसलिए बैंक का हिन्दी रूप अधिकोष उसके वास्तविक कार्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
बैंक का हिन्दी अर्थ और उसका महत्व
बैंक का हिन्दी अर्थ अधिकोष होने के साथ-साथ इसे “वित्तीय संस्था” भी कहा जाता है। यह ऐसी संस्था होती है जो जनता से धन जमा करती है और आवश्यकता पड़ने पर ऋण के रूप में धन उपलब्ध कराती है। बैंक आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं क्योंकि ये व्यापार, उद्योग, कृषि और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए पूंजी उपलब्ध कराते हैं। यदि बैंक न हों तो धन का सुरक्षित लेन-देन और निवेश करना कठिन हो जाएगा। हिन्दी में अधिकोष शब्द बैंक की उस भूमिका को दर्शाता है जिसमें वह लोगों की पूंजी को सुरक्षित रखता है और उसे बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है। आज के डिजिटल युग में बैंकिंग सेवाएँ मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से भी उपलब्ध हैं, जिससे लोगों का जीवन और भी आसान हो गया है।
भारत में बैंकिंग व्यवस्था का विकास
भारत में बैंकिंग व्यवस्था का विकास समय के साथ धीरे-धीरे हुआ है। प्रारंभ में साहूकार और महाजन धन उधार देने का कार्य करते थे। बाद में संगठित बैंकिंग प्रणाली की शुरुआत हुई और विभिन्न राष्ट्रीयकृत तथा निजी बैंकों की स्थापना की गई। स्वतंत्रता के बाद बैंकिंग क्षेत्र में कई सुधार किए गए, जिनसे ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सुविधाएँ पहुँच सकीं। आज भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंक कार्य कर रहे हैं। डिजिटल बैंकिंग, एटीएम, नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी सुविधाओं ने बैंकिंग को और अधिक सरल और सुलभ बना दिया है। इस प्रकार बैंक केवल धन रखने का स्थान नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बन गया है।
बैंक के प्रमुख कार्य
बैंक के प्रमुख कार्यों में धन जमा करना, ऋण प्रदान करना और विभिन्न प्रकार की वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध कराना शामिल है। जब कोई व्यक्ति अपनी बचत बैंक में जमा करता है तो बैंक उसे सुरक्षित रखता है और उस पर ब्याज भी देता है। दूसरी ओर, बैंक उन्हीं जमा राशियों का उपयोग करके जरूरतमंद लोगों या व्यवसायों को ऋण प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त बैंक चेक सुविधा, ड्राफ्ट, ऑनलाइन ट्रांसफर, डेबिट और क्रेडिट कार्ड जैसी सेवाएँ भी प्रदान करता है। आजकल बैंक बीमा, निवेश और म्यूचुअल फंड जैसी सेवाएँ भी उपलब्ध कराते हैं। इन सभी कार्यों के माध्यम से बैंक आर्थिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आधुनिक बैंकिंग और डिजिटल परिवर्तन
आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था में डिजिटल तकनीक का महत्वपूर्ण योगदान है। पहले लोगों को बैंक में लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था, लेकिन अब अधिकांश कार्य मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से घर बैठे किए जा सकते हैं। एटीएम मशीनों ने नकद निकासी को आसान बनाया है, जबकि यूपीआई और ऑनलाइन भुगतान प्रणाली ने लेन-देन को तेज और सुरक्षित बना दिया है। डिजिटल बैंकिंग ने समय और संसाधनों की बचत की है तथा पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है। आज के समय में बैंक केवल भौतिक शाखाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से चौबीसों घंटे सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। इस प्रकार बैंकिंग क्षेत्र निरंतर तकनीकी विकास के साथ आगे बढ़ रहा है।









