Guar Mandi Bhav Today: कई वर्षों से शांत पड़े ग्वार बाजार में अचानक आई तेजी ने किसानों और व्यापारियों दोनों को चौंका दिया है। जो फसल धीरे-धीरे किसानों की प्राथमिक सूची से बाहर होती जा रही थी, वही अब फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। 20 फरवरी 2026 के आसपास ग्वार के भावों में मजबूत सुधार दर्ज किया गया है। औसतन कई जगहों पर भाव ₹7000 प्रति क्विंटल के करीब बताए जा रहे हैं, जबकि प्रमुख उत्पादक राज्यों में रेट अलग-अलग स्तर पर बने हुए हैं।
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मंडियों में बढ़ती खरीद, सीमित आवक और वायदा बाजार की मजबूती ने पूरे माहौल को बदल दिया है। किसान अब बेहतर दाम की उम्मीद में हैं और बाजार विशेषज्ञ भी आने वाले समय को लेकर सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं आज का ताजा ग्वार मंडी भाव, तेजी की वजहें और आगे की संभावनाएं।
आज का ताजा ग्वार मंडी भाव: किस मंडी में क्या चल रहा है?
देश की अलग-अलग कृषि मंडियों में ग्वार के रेट क्वालिटी और मांग के आधार पर अलग-अलग देखने को मिल रहे हैं। राजस्थान और हरियाणा जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में बाजार फिलहाल मजबूत बना हुआ है।
प्रमुख मंडियों के अनुमानित भाव (₹ प्रति क्विंटल)
वायदा बाजार में भी मजबूती देखने को मिल रही है। National Commodity and Derivatives Exchange (NCDEX) पर ग्वार सीड मार्च कॉन्ट्रैक्ट के तहत ₹5,338 से ₹5,394 प्रति क्विंटल के बीच कारोबार कर रहा है। वहीं ग्वार गम का भाव ₹10,400 से ₹10,800 प्रति क्विंटल के दायरे में बना हुआ है।
ग्वार में 16 साल बाद क्यों आई इतनी तेजी?
अगर पुराने रिकॉर्ड देखें तो 2010–2012 के दौरान ग्वार ने अभूतपूर्व ऊंचाई छुई थी। उस समय अंतरराष्ट्रीय मांग में अचानक उछाल आया था और कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं। अब एक बार फिर बाजार में कुछ वैसे ही संकेत दिखाई दे रहे हैं।
ग्वार गम का उपयोग तेल और गैस उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और दवा उद्योग में बड़े पैमाने पर किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मांग का असर घरेलू बाजार पर साफ दिख रहा है। इसके अलावा इस सीजन में कई इलाकों में उत्पादन अनुमान से कम रहा, जिससे स्टॉक सीमित बताया जा रहा है। यही वजह है कि करीब 16 साल बाद ग्वार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
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तेजी के पीछे कौन-कौन से कारण काम कर रहे हैं?
ग्वार के मौजूदा रुझान के पीछे कई अहम फैक्टर हैं।
- सबसे बड़ा कारण निर्यात में सुधार माना जा रहा है। विदेशी ऑर्डर बढ़ने से बाजार में मांग मजबूत हुई है।
- दूसरा कारण सीमित आवक है। मंडियों में माल कम पहुंच रहा है, जिससे कीमतों को सहारा मिल रहा है।
- तीसरा कारण व्यापारियों की सक्रिय खरीदारी है। भविष्य में और तेजी की संभावना को देखते हुए स्टॉक बढ़ाया जा रहा है।
- चौथा कारण वायदा बाजार की सकारात्मक दिशा है। NCDEX में मजबूती का असर स्पॉट मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है।
क्या ग्वार फिर से पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकता है?
कई किसान यह सोच रहे हैं कि क्या ग्वार फिर से ₹20,000 या ₹30,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच सकता है। फिलहाल बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी छलांग तुरंत संभव नहीं है। हालांकि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग और बढ़ती है और सप्लाई सीमित रहती है, तो लंबी अवधि में अच्छे स्तर देखने को मिल सकते हैं।
ग्वार का बाजार ऐतिहासिक रूप से काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। इसलिए केवल एक अनुमान के आधार पर निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है।
किसानों के लिए सही रणनीति क्या हो सकती है?
मौजूदा तेजी को देखते हुए किसानों को संयम बरतना चाहिए। जिनके पास अच्छी क्वालिटी का ग्वार है, वे चरणबद्ध बिक्री पर विचार कर सकते हैं। इससे औसत बेहतर बनाने का मौका मिल सकता है।
इसके साथ ही मंडी के दैनिक भाव, वायदा बाजार की चाल और निर्यात से जुड़ी खबरों पर लगातार नजर रखना जरूरी है। अगर बाजार में मजबूती बनी रहती है तो आगे और सुधार संभव है, लेकिन अचानक गिरावट की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आने वाले समय में ग्वार बाजार का रुख कैसा रह सकता है?
आने वाले हफ्तों में ग्वार के भाव निर्यात ऑर्डर, घरेलू स्टॉक, नई फसल के अनुमान और वैश्विक कमोडिटी बाजार की स्थिति पर निर्भर करेंगे। फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल है और गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।
यह कहना गलत नहीं होगा कि 16 साल बाद ग्वार ने फिर से बाजार में जान डाल दी है। अब यह देखना रोचक होगा कि यह तेजी कितनी लंबी चलती है और क्या ग्वार एक बार फिर किसानों के लिए सुनहरा अवसर साबित होता है।
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